वाल्मीकि रामायण 7.61.22
एवंप्रभावो लवणः शूलं चैव तथाविधम् ।श्रुत्वा प्रमाणं काकुत्स्थ त्वं हि नः परमा गतिः॥
evaṃprabhāvo lavaṇaḥ śūlaṃ caiva tathāvidham |śrutvā pramāṇaṃ kākutstha tvaṃ hi naḥ paramā gatiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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