वाल्मीकि रामायण 7.62.20
उत्तरं च न वक्तव्यं शूर वाक्यान्तरे मम ।बालेन पूर्वजस्याज्ञा कर्तव्या नात्र संशयः॥
uttaraṃ ca na vaktavyaṃ śūra vākyāntare mama |bālena pūrvajasyājñā kartavyā nātra saṃśayaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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