वाल्मीकि रामायण 7.67.3
तस्य तद्वचनं श्रुत्वा शत्रुघ्नस्य महात्मनः ।प्रत्युवाच महातेजाश्च्यवनो रघुनन्दनम्॥
tasya tadvacanaṃ śrutvā śatrughnasya mahātmanaḥ |pratyuvāca mahātejāścyavano raghunandanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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