वाल्मीकि रामायण 7.67.5
अयोध्यायां पुरा राजा युवनाश्वसुतो बली ।मान्धातेति स विख्यातस्त्रिषु लोकेषु वीर्यवान्॥
ayodhyāyāṃ purā rājā yuvanāśvasuto balī |māndhāteti sa vikhyātastriṣu lokeṣu vīryavān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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