वाल्मीकि रामायण 7.7.18
सूर्यादिव करा घोरा ऊर्मयः सागरादिव ।पर्वतादिव नागेन्द्रा धारौघा इव चाम्बुदात्॥
sūryādiva karā ghorā ūrmayaḥ sāgarādiva |parvatādiva nāgendrā dhāraughā iva cāmbudāt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें