वाल्मीकि रामायण 7.7.20
शरभेण यथा सिंहाः सिंहेन द्विरदा यथा ।द्विरदेन यथा व्याघ्रा व्याघ्रेण द्वीपिनो यथा॥
śarabheṇa yathā siṃhāḥ siṃhena dviradā yathā |dviradena yathā vyāghrā vyāghreṇa dvīpino yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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