वाल्मीकि रामायण 7.7.35
ते मालिदेहमासाद्य वज्रविद्युत्प्रभाः शराः ।पिबन्ति रुधिरं तस्य नागा इव सुधारसम्॥
te mālidehamāsādya vajravidyutprabhāḥ śarāḥ |pibanti rudhiraṃ tasya nāgā iva sudhārasam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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