वाल्मीकि रामायण 7.7.5
स्यन्दनैः स्यन्दनगता गजैश्च गजपृष्ठगाः ।अश्वारोहास्तथाश्वैश्च पादाताश्चाम्बरे स्थिताः॥
syandanaiḥ syandanagatā gajaiśca gajapṛṣṭhagāḥ |aśvārohāstathāśvaiśca pādātāścāmbare sthitāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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