वाल्मीकि रामायण 7.70.3
वरदास्तु महाबाहो सर्व एव समागताः ।विजयाकाङ्क्षिणस्तुभ्यममोघं दर्शनं हि नः॥
varadāstu mahābāho sarva eva samāgatāḥ |vijayākāṅkṣiṇastubhyamamoghaṃ darśanaṃ hi naḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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