वाल्मीकि रामायण 7.70.5
इयं मधुपुरी रस्या मधुरा देवनिर्मिता ।निवेशं प्राप्नुयाच्छीघ्रमेष मे ऽस्तु वरः परः॥
iyaṃ madhupurī rasyā madhurā devanirmitā |niveśaṃ prāpnuyācchīghrameṣa me 'stu varaḥ paraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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