वाल्मीकि रामायण 7.70.7
ते तथोक्त्वा महात्मानो दिवमारुरुहुस्तदा ।शत्रुघ्नो ऽपि महातेजास्तां सेनां समुपानयत्॥
te tathoktvā mahātmāno divamāruruhustadā |śatrughno 'pi mahātejāstāṃ senāṃ samupānayat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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