वाल्मीकि रामायण 7.71.2
ततो मन्त्रिपुरोगांश्च बलमुख्यान्निवर्त्य च ।जगाम हयमुख्यैश्च रथानां च शतेन सः॥
tato mantripurogāṃśca balamukhyānnivartya ca |jagāma hayamukhyaiśca rathānāṃ ca śatena saḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें