वाल्मीकि रामायण 7.76.24
सो ऽभिवाद्य महात्मानं ज्वलन्तमिव तेजसा ।आतिथ्यं परमं प्राप्य निषसाद नराधिपः॥
so 'bhivādya mahātmānaṃ jvalantamiva tejasā |ātithyaṃ paramaṃ prāpya niṣasāda narādhipaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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