वाल्मीकि रामायण 7.76.37
आसन्कृतयुगे राम ब्रह्मभूते पुरायुगे ।अपार्थिवाः प्रजाः सर्वाः सुराणां तु शतक्रतुः॥
āsankṛtayuge rāma brahmabhūte purāyuge |apārthivāḥ prajāḥ sarvāḥ surāṇāṃ tu śatakratuḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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