वाल्मीकि रामायण 7.76.47
तस्य तद्वचनं श्रुत्वा ऋषेः परमधार्मिकम् ।तद्रामः प्रतिजग्राह मुनेराभरणं वरम्॥
tasya tadvacanaṃ śrutvā ṛṣeḥ paramadhārmikam |tadrāmaḥ pratijagrāha munerābharaṇaṃ varam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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