वाल्मीकि रामायण 7.77.18
तमहं देवसङ्काशमारोहन्तमुदीक्ष्य वै ।अथाहमब्रुवं वाक्यं स्वर्गिणं पुरुषर्षभ॥
tamahaṃ devasaṅkāśamārohantamudīkṣya vai |athāhamabruvaṃ vākyaṃ svargiṇaṃ puruṣarṣabha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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