वाल्मीकि रामायण 7.77.3
तस्य रूपमरण्यस्य निर्देष्टुं न शशाक ह ।फलमूलैः सुखास्वादैर्बहुरूपैश्च पादपैः॥
tasya rūpamaraṇyasya nirdeṣṭuṃ na śaśāka ha |phalamūlaiḥ sukhāsvādairbahurūpaiśca pādapaiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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