वाल्मीकि रामायण 7.79.16
अपश्यमानस्तं देशं घोरं पुत्रस्य राघव ।विन्ध्यशैवलयोर्मध्ये राज्यं प्रादादरिन्दम॥
apaśyamānastaṃ deśaṃ ghoraṃ putrasya rāghava |vindhyaśaivalayormadhye rājyaṃ prādādarindama ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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