वाल्मीकि रामायण 7.8.2
संरक्तनयनः कोपाच्चलन्मौलिर्निशाचरः ।पद्मनाभमिदं प्राह वचनं पुरुषोत्तमम्॥
saṃraktanayanaḥ kopāccalanmaulirniśācaraḥ |padmanābhamidaṃ prāha vacanaṃ puruṣottamam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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