वाल्मीकि रामायण 7.8.3
नारायण न जानीषे क्षात्रधर्मं पुरातनम् ।अयुद्धमनसो भीतानस्मान्हंसि यथेतरः॥
nārāyaṇa na jānīṣe kṣātradharmaṃ purātanam |ayuddhamanaso bhītānasmānhaṃsi yathetaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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