वाल्मीकि रामायण 7.88.15
सदृशीयं मम भवेद्यदि नान्यपरिग्रहः ।इति बुद्धिं समास्थाय जलात्कूलमुपागमत्॥
sadṛśīyaṃ mama bhavedyadi nānyaparigrahaḥ |iti buddhiṃ samāsthāya jalātkūlamupāgamat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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