वाल्मीकि रामायण 7.90.15
ततो यज्ञो महानासीद्बुधाश्रमसमीपतः ।रुद्रश्च परमं तोषमाजगाम महायशाः॥
tato yajño mahānāsīdbudhāśramasamīpataḥ |rudraśca paramaṃ toṣamājagāma mahāyaśāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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