वाल्मीकि रामायण 7.90.17
प्रीतो ऽस्मि हयमेधेन भक्त्या च द्विजसत्तमाः ।अस्य बाह्लिपतेश्चैव किं करोमि प्रियं शुभम्॥
prīto 'smi hayamedhena bhaktyā ca dvijasattamāḥ |asya bāhlipateścaiva kiṃ karomi priyaṃ śubham ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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