वाल्मीकि रामायण 7.90.18
तथा वदति देवेशे द्विजास्ते सुसमाहिताः ।प्रसादयन्ति देवेशं यथा स्यात्पुरुषस्त्विला॥
tathā vadati deveśe dvijāste susamāhitāḥ |prasādayanti deveśaṃ yathā syātpuruṣastvilā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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