वाल्मीकि रामायण 7.93.5
स शिष्यावब्रवीद्धृष्टौ युवां गत्वा समाहितौ ।कृत्स्नं रामायणं काव्यं गायेथां परया मुदा॥
sa śiṣyāvabravīddhṛṣṭau yuvāṃ gatvā samāhitau |kṛtsnaṃ rāmāyaṇaṃ kāvyaṃ gāyethāṃ parayā mudā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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