वाल्मीकि रामायण 7.94.16
प्रवृत्तमादितः पूर्वसर्गं नारददर्शितम् ।ततः प्रभृति सर्गांश्च यावद्विंशत्यगायताम्॥
pravṛttamāditaḥ pūrvasargaṃ nāradadarśitam |tataḥ prabhṛti sargāṃśca yāvadviṃśatyagāyatām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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