Loading
वाल्मीकि रामायण 7.94.28
प्रतिष्ठा ऽ ऽजीवितं यावत्तावत्सर्वस्य वर्तते॥
pratiṣṭhā ' 'jīvitaṃ yāvattāvatsarvasya vartate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंप्रतिष्ठा ऽ ऽजीवितं यावत्तावत्सर्वस्य वर्तते॥
pratiṣṭhā ' 'jīvitaṃ yāvattāvatsarvasya vartate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें