वाल्मीकि रामायण 7.96.2
वसिष्ठो वामदेवश्च जाबालिरथ काश्यपः ।विश्वामित्रो दीर्घतपा दुर्वासाश्च महातपाः॥
vasiṣṭho vāmadevaśca jābāliratha kāśyapaḥ |viśvāmitro dīrghatapā durvāsāśca mahātapāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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