वाल्मीकि रामायण 7.96.8
क्षत्रिया ये च शूद्राश्च वैश्याश्चैव सहस्रशः ।नानादेशगताश्चैव ब्राह्मणाः संशितव्रताः॥
kṣatriyā ye ca śūdrāśca vaiśyāścaiva sahasraśaḥ |nānādeśagatāścaiva brāhmaṇāḥ saṃśitavratāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें