वाल्मीकि रामायण 7.98.13
न खलु त्वां महाबाहो स्मारयेयमनुत्तमम् ।इमं मुहूर्तं दुर्धर्ष स्मर त्वं जन्म वैष्णवम्॥
na khalu tvāṃ mahābāho smārayeyamanuttamam |imaṃ muhūrtaṃ durdharṣa smara tvaṃ janma vaiṣṇavam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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