पत्र खुल रहा है
लोड हो रहा है…पत्र खुल रहा है
लोड हो रहा है…
पाठ्यक्रम से जुड़ते ही धागा और मुहर खुल जाते हैं।
राजा भरत और भीष्म की प्रतिज्ञा से लेकर पांडवों और कौरवों के जन्म और इंद्रप्रस्थ की स्थापना तक।
नामांकन करें, और इस पाठ्यक्रम का हर प्रवचन जारी होते ही आपके लिए खुलेगा।
इस प्रवचन का हर श्लोक इन ग्रंथों से मिलाया जा सकता है।
Mahabharata, Adi Parva
1.69.22
Mahabharata, Adi Parva
1.69.28-1.69.33 (Shakuntala, the voice from the sky, and the naming of Bharata, paraphrased)
Mahabharata, Adi Parva
1.94.88
Mahabharata, Adi Parva
1.94.80-1.94.94 (Devavrata and the fishers' chief, paraphrased)
Mahabharata, Adi Parva
1.123 to 1.199 (the princes' education, the house of lac, Draupadi's svayamvara, Indraprastha; summary, paraphrased)
यह प्रवचन हमारे विद्वान समीक्षकों द्वारा समीक्षित ग्रंथ-पाठ से सुनाया गया है। आचार्य पात्र एक कलात्मक प्रस्तुति है।
सूत्रधार ऋषि एक कलात्मक पात्र हैं, कोई ऐतिहासिक व्यक्ति नहीं। जहाँ कोई कथा मूल पाठ के बजाय बाद की परंपरा से आती है, वहाँ वे यह स्पष्ट बताते हैं।