पत्र खुल रहा है
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दीपक 31 अक्टू॰, 6:00 am IST पर जलेगा
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यह प्रवचन अभी जारी नहीं हुआ है
कुरुक्षेत्र में सेनाएँ आमने-सामने आती हैं, गीता कही जाती है, युधिष्ठिर भीष्म को प्रणाम करते हैं, और पितामह का पतन होता है।
31 अक्टू॰, 6:00 am IST से आरंभ
इस प्रवचन का हर श्लोक इन ग्रंथों से मिलाया जा सकता है।
Mahabharata, Bhishma Parva
6.40.78
Mahabharata, Bhishma Parva
6.41.36
Mahabharata, Bhishma Parva
6.23-6.40 (the Bhagavad Gita within the Bhishma Parva, paraphrased)
Mahabharata, Bhishma Parva
6.41.30-6.41.42 (Yudhishthira and Bhishma, paraphrased)
Mahabharata, Bhishma Parva
6.103-6.115 (Shikhandi, the fall of Bhishma, the pillow of arrows; paraphrased)
Mahabharata, Bhishma Parva
6.115.48 (paraphrased)
यह प्रवचन हमारे विद्वान समीक्षकों द्वारा समीक्षित ग्रंथ-पाठ से सुनाया गया है। आचार्य पात्र एक कलात्मक प्रस्तुति है।
सूत्रधार ऋषि एक कलात्मक पात्र हैं, कोई ऐतिहासिक व्यक्ति नहीं। जहाँ कोई कथा मूल पाठ के बजाय बाद की परंपरा से आती है, वहाँ वे यह स्पष्ट बताते हैं।