पत्र खुल रहा है
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दीपक 30 अक्टू॰, 6:00 am IST पर जलेगा
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यह प्रवचन अभी जारी नहीं हुआ है
दोनों पक्ष मित्र खोजते हैं, कृष्ण पांडवों के दूत बनकर हस्तिनापुर जाते हैं, और दुर्योधन सुई की नोक के बराबर भूमि भी देने से मना कर देता है।
30 अक्टू॰, 6:00 am IST से आरंभ
इस प्रवचन का हर श्लोक इन ग्रंथों से मिलाया जा सकता है।
Mahabharata, Udyoga Parva
5.125.26
Mahabharata, Udyoga Parva
5.126.48
Mahabharata, Udyoga Parva
5.126.37-5.126.39 (Krishna recalls Kamsa, paraphrased)
Mahabharata, Udyoga Parva
5.7-5.8 (Duryodhana and Arjuna come to Krishna, the choice of Krishna or the army; paraphrased)
Mahabharata, Udyoga Parva
5.129 (the assembly, Krishna's glimpse of his greater form, paraphrased)
Mahabharata, Udyoga Parva
5.138-5.144 (Krishna, Kunti and Karna; paraphrased)
यह प्रवचन हमारे विद्वान समीक्षकों द्वारा समीक्षित ग्रंथ-पाठ से सुनाया गया है। आचार्य पात्र एक कलात्मक प्रस्तुति है।
सूत्रधार ऋषि एक कलात्मक पात्र हैं, कोई ऐतिहासिक व्यक्ति नहीं। जहाँ कोई कथा मूल पाठ के बजाय बाद की परंपरा से आती है, वहाँ वे यह स्पष्ट बताते हैं।