महाभारत 1.155.7
याजोपयाजौ ब्रह्मर्षी शाम्यन्तौ पृषतात्मजःसंहिताध्ययने युक्तौ गोत्रतश्चापि काश्यपौ
yājopayājau brahmarṣī śāmyantau pṛṣatātmajaḥsaṃhitādhyayane yuktau gotrataścāpi kāśyapau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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