महाभारत 1.192.2
येन तद्धनुरायम्य लक्ष्यं विद्धं महात्मनासोऽर्जुनो जयतां श्रेष्ठो महाबाणधनुर्धरः
yena taddhanurāyamya lakṣyaṃ viddhaṃ mahātmanāso'rjuno jayatāṃ śreṣṭho mahābāṇadhanurdharaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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