महाभारत 11.4.13
मूर्खानिति परानाह नात्मानं समवेक्षतेशिक्षां क्षिपति चान्येषां नात्मानं शास्तुमिच्छति
mūrkhāniti parānāha nātmānaṃ samavekṣateśikṣāṃ kṣipati cānyeṣāṃ nātmānaṃ śāstumicchati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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