महाभारत 12.137.12
बाष्पपूर्णमुखी दीना दृष्ट्वा सा तु हतं सुतम्पूजनी दुःखसंतप्ता रुदती वाक्यमब्रवीत्
bāṣpapūrṇamukhī dīnā dṛṣṭvā sā tu hataṃ sutampūjanī duḥkhasaṃtaptā rudatī vākyamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें