महाभारत 12.137.13
क्षत्रिये संगतं नास्ति न प्रीतिर्न च सौहृदम्कारणे संभजन्तीह कृतार्थाः संत्यजन्ति च
kṣatriye saṃgataṃ nāsti na prītirna ca sauhṛdamkāraṇe saṃbhajantīha kṛtārthāḥ saṃtyajanti ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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