महाभारत 12.137.24
सर्वेषां कृतवैराणामविश्वासः सुखावहःएकान्ततो न विश्वासः कार्यो विश्वासघातकः
sarveṣāṃ kṛtavairāṇāmaviśvāsaḥ sukhāvahaḥekāntato na viśvāsaḥ kāryo viśvāsaghātakaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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