महाभारत 12.161.22
अस्मिंस्तु वै सुसंवृत्ते दुर्लभे परमप्रियेइह कामानवाप्नोति प्रत्यक्षं नात्र संशयः
asmiṃstu vai susaṃvṛtte durlabhe paramapriyeiha kāmānavāpnoti pratyakṣaṃ nātra saṃśayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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