महाभारत 12.290.73
नभो वहति लोकेश रजसः परमां गतिम्रजो वहति राजेन्द्र सत्त्वस्य परमां गतिम्
nabho vahati lokeśa rajasaḥ paramāṃ gatimrajo vahati rājendra sattvasya paramāṃ gatim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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