महाभारत 12.301.5
वागध्यात्ममिति प्राहुर्यथाश्रुतिनिदर्शनम्वक्तव्यमधिभूतं तु वह्निस्तत्राधिदैवतम्
vāgadhyātmamiti prāhuryathāśrutinidarśanamvaktavyamadhibhūtaṃ tu vahnistatrādhidaivatam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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