महाभारत 12.318.40
क्लेशाः प्रतिनिवर्तन्ते केषांचिदसमीक्षिताःस्वं स्वं च पुनरन्येषां न किंचिदभिगम्यते
kleśāḥ pratinivartante keṣāṃcidasamīkṣitāḥsvaṃ svaṃ ca punaranyeṣāṃ na kiṃcidabhigamyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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