महाभारत 12.318.41
महच्च फलवैषम्यं दृश्यते कर्मसंधिषुवहन्ति शिबिकामन्ये यान्त्यन्ये शिबिकागताः
mahacca phalavaiṣamyaṃ dṛśyate karmasaṃdhiṣuvahanti śibikāmanye yāntyanye śibikāgatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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