महाभारत 12.318.44
त्यज धर्ममधर्मं च उभे सत्यानृते त्यजउभे सत्यानृते त्यक्त्वा येन त्यजसि तं त्यज
tyaja dharmamadharmaṃ ca ubhe satyānṛte tyajaubhe satyānṛte tyaktvā yena tyajasi taṃ tyaja
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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