महाभारत 12.318.45
एतत्ते परमं गुह्यमाख्यातमृषिसत्तमयेन देवाः परित्यज्य मर्त्यलोकं दिवं गताः
etatte paramaṃ guhyamākhyātamṛṣisattamayena devāḥ parityajya martyalokaṃ divaṃ gatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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