महाभारत 12.318.53
तस्माद्योगं समास्थाय त्यक्त्वा गृहकलेवरम्वायुभूतः प्रवेक्ष्यामि तेजोराशिं दिवाकरम्
tasmādyogaṃ samāsthāya tyaktvā gṛhakalevaramvāyubhūtaḥ pravekṣyāmi tejorāśiṃ divākaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें