महाभारत 13.137.14
पूर्वो ब्रह्मोत्तरो वादो द्वितीयः क्षत्रियोत्तरःत्वयोक्तौ यौ तु तौ हेतू विशेषस्त्वत्र दृश्यते
pūrvo brahmottaro vādo dvitīyaḥ kṣatriyottaraḥtvayoktau yau tu tau hetū viśeṣastvatra dṛśyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें