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महाभारत 13.137.15
ब्राह्मणाः संश्रिताः क्षत्रं न क्षत्रं ब्राह्मणाश्रितम्श्रितान्ब्रह्मोपधा विप्राः खादन्ति क्षत्रियान्भुवि
brāhmaṇāḥ saṃśritāḥ kṣatraṃ na kṣatraṃ brāhmaṇāśritamśritānbrahmopadhā viprāḥ khādanti kṣatriyānbhuvi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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