महाभारत 13.92.21
एते च पितरो राजन्नेष श्राद्धविधिः परःप्रेतास्तु पिण्डसंबन्धान्मुच्यन्ते तेन कर्मणा
ete ca pitaro rājanneṣa śrāddhavidhiḥ paraḥpretāstu piṇḍasaṃbandhānmucyante tena karmaṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें